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Monday, 14 November 2016

त्याग लोभ धर धैर्य, मान रविकर रख लेना


देना है तो दान दो, लेना है तो ज्ञान।
अगर निगलना ही पड़े, निगलो निज अपमान।
निगलो निज अपमान, चलो गम खाना सीखो।
पीना सीखो क्रोध, नहीं बेमतलब चीखो।
त्याग लोभ धर धैर्य, मान रविकर रख लेना।
कर लेना यश प्राप्त, फेंक मद ईर्ष्या देना ।।

Monday, 7 November 2016

रविकर के दोहे



दिया दूसरों ने जनम, नाम, काम, सद्ज्ञान।
ले जायें शमशान भी, तू क्यों करे गुमान ।।

दनदनाय दौड़े मदन, चढ़े बदन पर जाय।

खजुराहो को देखकर, काशी भी पगलाय।।



कैसे कोई अन्न जल, कर सकता बरबाद।

संसाधन साझे सकल, रखना रविकर याद।।



शशि में सुंदरता दिखे, दिखे सूर्य में शक्ति।

सुंदरतम कृति ईश की, दर्पण में जो व्यक्ति।।



ठोस कदम ऐसा उठा, पुल में पड़ी दरार।

फूंक फूंक रविकर कदम, रखे राज्य सरकार।।



ढेर ज्ञान संग्रह किया, लेकिन रविकर व्यर्थ।

करे वरण कुछ आचरण, होगा तभी समर्थ।।



नहीं मिलें इक वक्त पर, कभी रुदन-मुस्कान |

जिस क्षण ये दोनों मिलें, वह क्षण प्रभु वरदान ||


Monday, 24 October 2016

मरते रहे जवान, होय तेरह दिन स्यापा


व्यापारी फिल्मी जगत, कलाकार चुपचाप।
डाक्टर अधिवक्ता मगन, एक्टीविस्ट प्रलाप।
एक्टीविस्ट प्रलाप, खिलाड़ी नेता सारे।
इति अंधा कानून, बाँधता हाथ हमारे।
मरते रहे जवान, होय तेरह दिन स्यापा।
इसीलिए आतंक, विश्व भर मे है व्यापा।।

Friday, 7 October 2016

चिंता रहे छुपाय, पिताजी मिले विहँसकर-

हँसकर विद्यालय गई, घर आई चुपचाप |
देरी होती देख माँ, करती शुरू प्रलाप |
करती शुरू प्रलाप, देवता-देवि मनाये |
सभी लगाएं दौड़, थके-माँदे-घबराये |
मिलते ही मुस्कात, बहन माँ भाई रविकर |
चिंता रहे छुपाय, पिताजी मिले विहँसकर ||

Saturday, 1 October 2016

डाल मट्ठा रोज जड़ मे मुफ्त लेजा।।

बोलियों से चोट खाया है कलेजा।
ऐ शराफत अब जरा तशरीफ लेजा।।
शब्द भेजा खा रहे थे अब तलक वो
क्यूं ललक से यूं पलट पैगाम भेजा।।
जो गले मिलते रहे थे प्यार से तब
खाट पर बैठे, पड़ो उनके गले जा।
जब चुगी चिड़िया हमारा खेत सारा
हाथ पर यूं हाथ रखकर मत मले जा।
दुष्ट करते खोखला खा कर यहीं का
गा रहे जो शत्रु की, फौरन चले जा।
याद रख रविकर सदी से चोट सहता
हो बरेली बांस वापस अब खले जा।।
रोज बावन हाथ बढ़ती बेल विष की
डाल मट्ठा रोज जड़ मे मुफ्त लेजा।।

Thursday, 29 September 2016

पी ओ के अपनी धरा, धरो मगज में बात-

पी ओ के की गन्दगी, सैनिक रहे हटाय।
इसी स्वच्छता मिशन से, पाक साफ हो जाय।।

पी ओ के अपनी धरा, धरो मगज में बात।
आते जाते हम रहें, दिन हो चाहे रात।।



चौड़ी छाती हो गयी, रविकर छप्पन इंच।
धूर्त मीडिया को करे, वार-सर्जिकल पिंच।
वार सर्जिकल पिंच, रखैलें बरखा दत्ती।
रही खोजती लोच, जला के दिन में बत्ती।
ह्युमेन राइट आज, करेगा हरकत भौंड़ी।
भड़ुवे करें विलाप, भक्त खा रहे कचौड़ी।।



मना मुहर्रम उरी में, धुरी चुकी है घूम।
मची पाक में खलबली, दीवाली की धूम।
दीवाली की धूम, बूम बुम बम बम बारी।
परेशान था देश, किन्तु करके तैयारी।
देते धावा बोल, पूर्ण कर रहे कामना।
करो ठीक भूगोल, तिरंगा उच्च थामना।।

Sunday, 25 September 2016

दाता अपने नाम, भेजते रहिए डाटा-


डाटा जैसे अॉन हो, हे दाता भगवान।
प्राप्त परमगति झट करे, यह मूरख इंसान।
यह मूरख इंसान, ध्यान योगासन रोजा।
भूले धर्म विभेद, खुदा डाटा में खोजा।
परिजन स्वजन बिसार, चाहता है सन्नाटा।
दाता अपने नाम, भेजते रहिए डाटा।।