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Thursday, 9 February 2012

राज-तंत्र की बेल, ताकता रायबरेली

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राय-बरेली फिर सजे, दिखे नए युवराय ।
नव पीढ़ी जो मंच पर, मम्मी मन हरषाय।

मम्मी मन हरषाय, देख के नाती-नातिन ।
राहुल उम्र-दराज, साल जो बीते छिन-छिन  ।

ख़्वाब व्याह का देख, हारती थककर डेली ।
राज-तंत्र की बेल, बढ़ी इन रायबरेली ।।
 
पाला पोसा शौक से, बढ़ी नहीं जब बेल ।
तब चुनाव के मंच पर, दिखा अनोखा खेल ।

दिखा अनोखा खेल, डोर सत्ता की पकड़े ।
नौनिहाल अल-बेल , खड़े मैया को जकड़े ।

सदियों से परिवार, देश का रविकर आला ।
अगली पीढ़ी ठाढ़, पड़े अब इनसे पाला ।।

11 comments:

  1. सटीक राजनैतिक कुण्डलियाँ .

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  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. सदियों से परिवार, देश का रविकर आला ।
    अगली पीढ़ी ठाढ़, पड़े अब इनसे पाला ।।
    ....rajniti ka khel ujagar karti sateek prastuti..

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  4. बहुत बढ़िया प्रस्तुति..

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  5. परिवार की जागीर समझ रहे हैं...।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद |

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  6. पाला पोसा शौक से, बढ़ी नहीं जब बेल ।
    तब चुनाव के मंच पर, दिखा अनोखा खेल ।
    क्या धोया है कथित नंबर एक खानदान को .

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