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Saturday, 10 March 2012

छत पर देखा पेड़, निगाहें बेहद पैनी-


नैनी नैनीताल का, पढ़ सुन्दर वृतान्त ।
जीप भुवाली से चली, सफ़र खुशनुमा शाँत ।
सफ़र खुशनुमा शाँत, खाय फल आडू जैसा ।
कहिये किन्तु हिसाब, खर्च कर कितना पैसा ?
छत पर देखा पेड़, निगाहें बेहद पैनी ।
वाह जाट की ऐड़, अकेले घूमा नैनी  ।।


राहुल आइसक्रीम लें, दिग्गी लें कोकीन |
इस अवसादी घडी में, जल बिन तडपे मीन |
जल बिन तडपे मीन, छीन कर सपने भागा |
लाओ एक जहीन, कराये योगा- यागा |
कर ले योग विषाद, राम-लीला गर खाली |
लागे फिर से शिविर, भेजिए झट पड़ताली ||
खुशियों का स्वागत करो, जी-भर जी भरपूर ।  
गाँठ बाँध रख न सकें, समय देव अति-क्रूर ।।



अभिलाषा मन की अभी, करना चाहें पूर ।
मुझमें देखें कैरिअर, आस किरण इक दूर ।
आस किरण इक दूर, करूँगा पूरी इच्छा ।
कठिन परिश्रम कर, करूँ उत्तीर्ण परीक्षा  ।
लेकिन गलती पर, करें न आप तमाशा ।
बचपन में क्या आप, किये ना यह अभिलाषा ।।

 
  उच्चारण
फूल हँसे कलियाँ मुस्काई, कविवर हँसना न आया ।
शब्द हृदय के गीत मिलन के, होंठ पे बसना न आया ।
कोरे कागज़ काले अक्षर,  लिखना पढना न आया ।
लेना देना सीख सका न, तुम बिन बढ़ना न आया ।।
 
दिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक  
dineshkidillagi.blogspot.com

8 comments:

  1. राहुल आइसक्रीम लें, दिग्गी लें कोकीन |
    इस अवसादी घडी में, जल बिन तडपे मीन |
    बढ़िया टिप्पणियां
    सादर.

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. अच्छी प्रस्तुति |
    आशा

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  4. अच्छी प्रस्तुति |

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  5. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
    शुभकामनाएँ

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  6. bigad jayegi ab dekhiye un sabhi ki sehat,
    jinhe nahi dikhti rahul ji ki mehnat.
    WAIT N WATCH.

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