Follow by Email

Wednesday, 14 March 2012

बड़े विरोधाभास थे, सहे अकेले ताप-


थोपा-थोपी का लगा, हिंदी पर आरोप ।
क्यूँ हिंदी 'अनुराग' का, झेलें 'शर्मा' कोप ।

झेलें 'शर्मा' कोप, तभी प्रत्युत्तर पटका ।
मन्ना दे अभिजीत, लाहिड़ी मलिक जूथिका।

बर्मन शान किशोर, सभी के हिंदी गाने ।
वन्दे मातरम सुन, इंडियन हुवे दिवाने ।।
हँसमुख जी हँसते रहें, हरदम हँसी-मजाक ।
लेकिन इक दिन कट गई, बीच मार्केट नाक ।

बीच मार्केट नाक, नमस्ते भाभी कह के ।
बच्चे तो गंभीर, मिले मुखड़ा ना चहके ।

बोलो हँसमुख कौन, बाप है इनका भाई ।
आप कहोगे नाम, कहे या इनकी माई ।।
लम्हों का सफ़र
शबनम करती गुप्तगू , दुपहर में चुपचाप ।
बड़े विरोधाभास थे, सहे अकेले ताप ।।




कविता कवि की कल्पना, बे-शक सपने पास ।
शब्दों की ठक-ठक सुने, किन्तु भाव का दास ।।

छले हकीकत आज की, सपने आते रास ।
 खड़ी मुसीबत न करें, घटे नहीं कुछ ख़ास ।।
पंडित जी के भूत को,  जोखुवा बुझा खूब ।
कारस्तानी कर्ज की, गई ढिठाई डूब ।


गई ढिठाई डूब, फँसे नारद के फन्दे ।
गन्दे धन्धे बन्द, हुए खुश सारे बन्दे ।

जोखुआ को आशीष, करें हम महिमा-मंडित ।
हुवे अधिक खुशहाल, कराते पूजा पंडित ।।


चाहे तारे तोड़ना, तोड़ ना मेरी चाह ।
रख इक टुकड़ा हौसला, वाह वाह भइ वाह ।। 
कहें इसी को प्यार,  सार यही है जिंदगी ।
 बहती भली बयार, मौन करूँ मैं बन्दगी ।।

स्वास्थ्य-लाभ अति-शीघ्र हो, तन-मन हो चैतन्य ।
दर्शन होते आपके, हुए आज हम धन्य ।

हुए आज हम धन्य, खिले घर-आँगन बगिया ।
खुशियों की सौगात, गात हो फिर से बढ़िया ।

रविकर सपने देख, आपकी रचना पढता ।
नित नवीन आयाम, समय दीदी हित गढ़ता ।। 

क्या होगा ?कब होगा? कैसे होगा ?
आशंका चिंता-भँवर, असमंजस में लोग ।
चिंतामणि की चाह में, गवाँ रहे संजोग । 

 गवाँ रहे संजोग, ढोंग छोडो ये सारे ।
मठ महंत दरवेश, खोजते मारे मारे ।

एक चिरंतन सत्य, फूंक चिंता की लंका ।
हँसों निरन्तर मस्त, रखो न मन आशंका ।।   


पाकिस्तान की बेटी का निकाह , अब हम करवाएंगे .......>>> संजय कुमार -
सोलह आने सत्य है, बात बड़ी दमदार ।
सोलह में से यह बड़ा, संस्कार  इस पार ।

संस्कार इस पार, बजे 'वीणा' शहनाई ।
हर्षित हिन्द अपार, बहू इक औरो आई ।
गई सानिया एक, बधाई लो अनजाने ।
पाक सोनिया बन, धाक हो सोलह आने ।।  




12 comments:

  1. लम्हों का सफ़र
    शबनम करती गुप्तगू , दुपहर में चुपचाप ।
    बड़े विरोधाभास थे, सहे अकेले ताप ।।
    कर टिपण्णी पर टिपण्णी , दे चिठ्ठा का सार ,

    रविकर हमार भैया ,रविकर हमार रे !

    ReplyDelete
  2. रविकर हमार टिपण्णी सार लेके आया रे ...चिठ्ठा तार लेकर आया रे ...

    ReplyDelete
  3. आपके टिप्पणी का अंदाज़ वाकई जुदा है.......

    शुक्रिया.

    ReplyDelete
  4. देखो कैसे चल रही दिल्ली की सरकार ,

    घुटने टूटे घायल चेहरा ,मरने की दरकार .

    टूटे घुटने जख्मी चेहरा ,गिरने को तैयार ,

    देखें सांसद खूब तमाशा ;

    ये भारत सरकार .,अरे भाई इसकी जय जैकार ,करो भाई इसकी जैजैकार .

    बोलो भाई इसकी जय जय कार .
    अब आगे की कथा रविकर भैया सुनावेंगे -

    ReplyDelete
  5. चाहे तारे तोड़ना, तोड़ ना मेरी चाह ।
    रख इक टुकड़ा हौसला, वाह वाह भइ वाह ।।
    क्या खूब कहा है .

    ReplyDelete
  6. अरे हम तो अपनी पोस्ट की प्रतिरचना खोजते ही रह गये!
    लेकिन फिर भी बहुत कमाल की टिप्पणियाँ करते हैं आप!

    ReplyDelete
  7. सटीक प्रस्तुति....!!

    ReplyDelete
  8. बहुत खूब भाई साहब .

    ReplyDelete
  9. कविता से कविताई ...बहुत खूब !

    ReplyDelete
  10. चाहे तारे तोड़ना, तोड़ ना मेरी चाह ।
    रख इक टुकड़ा हौसला, वाह वाह भइ वाह ।। bahut badiya hai

    ReplyDelete