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Saturday, 10 March 2012

पाक प्रेम में पिस पगी, पंक्ति एक से एक-

बसंती रंग छा गया,... 

काव्यान्जलि ..

धरती के वस्त्र पीत, अम्बर की बढ़ी प्रीत 
भवरों की हुई जीत, फगुआ सुनाइये ।
जीव-जंतु हैं अघात, नए- नए हरे पात 
देख खगों की बरात, फूल सा लजाइये ।
चांदनी शीतल श्वेत, अग्नि भड़काय देत 
कृष्णा को करत भेंट, मधुमास आइये ।  
धीर जब अधीर हो, पीर ही तकदीर हो 
उनकी तसवीर को , दिल में बसाइए ।।
तृप्त आत्मा हो गई, पढ़ विस्तृत-वृत्तान्त ।
यादें फिर ताजी हुईं, बेचैनी भी शाँत ।
  बेचैनी भी शाँत, दिखाते भवन निराले ।
बेफिक्र परिंदे पास, वाह रे ऊपरवाले ।
अस्सी और पचास, बचाया काफी पैसा ।
भाभी का नुक्सान, करें क्यूँ ऐसा-वैसा ।।

प्रेरक प्रसंग-27 : अपने मन को मना लिया

अपने मन को ली मना, बा को सतत प्रणाम |
बापू करते कब मना, सामन्जस परिणाम ||
सामन्जस परिणाम, आत्म-बल प्रेम समर्पण |
सत्य अहिंसा तुल्य, नियंत्रित कर ली तर्षण |
बापू बड़े महान, जोड़ते  भारत जन को |
उनमें बा के प्राण, भेंटती अपने मन को  |


पाक प्रेम में पिस पगी, पंक्ति एक से एक  ।
देवी जाती हो किधर, सुनो प्रेममय टेक । 


आसमान क्या देगा पंक्षी, धरती तुझको पाली।
दाना-पानी हवा आसरा, बरबस तुझे सँभाली ।
बार बार भटकाती काहे, आसमान की लाली ?
नील-गगन भर तू बाहों में, किन्तु रहेगा खाली ।। 

दिल में दफनाते गए, खले-गले घटनीय ।
उथल-पुथल हद से बढ़ी, स्वाहा सब अग्नीय ।।
गुरुवर गुरु-घंटाल है, केवल चाहे श्रेय ।
 रहा सिखाता नाट्य खुद, कर्म नहीं यह गेय ।
कर्म नहीं यह गेय, सहायक फ़िल्मी लाता ।
सन्नी सा पी पेय, मोड़ पर गान सिखाता । 
हार नहीं बर्दाश्त, चुनों इक बढ़िया चेला ।
चन्द्रगुप्त चाणक्य, बूझ अखिलेशी खेला ।।
दिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक  
dineshkidillagi.blogspot.com

6 comments:

  1. वाह!!!!!!!!!बहुत बढ़िया प्रस्तुति,...

    MY RESENT POST ...काव्यान्जलि ...:बसंती रंग छा गया,...

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  2. वाह! रविकर कविराज आप तो आशु कवि है
    क्षण में रचते छंद कलम के आप धनि हैं
    मंत्र मुग्ध हो जाते ब्लॉगर पढ़कर छंद आपके
    पा जाते हैं सार पोस्ट का गज़ब गुनि हैं।

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  3. धरती के वस्त्र पीत, अम्बर की बढ़ी प्रीत
    भवरों की हुई जीत, फगुआ सुनाइये ।
    जीव-जंतु हैं अघात, नए- नए हरे पात
    देख खगों की बरात, फूल सा लजाइये ।
    चांदनी शीतल श्वेत, अग्नि भड़काय देत
    कृष्णा को करत भेंट, मधुमास आइये ।
    धीर जब अधीर हो, पीर ही तकदीर हो

    उनकी तसवीर को , दिल में बसाइए ।।

    जब तोप मुक़ाबिल हो ,ब्लॉग - चक्रधर, रविकर बुलाइए .

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  4. बढ़िया.............
    आपकी प्रस्तुति को नमन..
    सादर.

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  5. अच्छी प्रस्तुति...
    सादर

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