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Tuesday, 8 May 2012

रविकर पहली डेट, बनाकर मुझको मामा -

आख़िर ऐसा क्यों हुआ ...............


जामा पौधा प्यार का, पहला पहला प्यार ।
फूला नहीं समा रहा, तन जामा में यार । 

तन जामा में यार, घटा कैफे में  नामा ।
मुझे पजामा बोल, करे जालिम हंगामा ।

रविकर पहली डेट, बना दी मुझको मामा ।
 करे नया आखेट, भागती खींच पजामा ।।

 
मेरे गीत जिताते आये,  जीवन की हर बाजी मीत |
मेरे गीत बताते आये, जन मन की मनमोहक प्रीत |
 
मेरे गीत सिखाते आये, दुनिया की हर सुन्दर रीत |
मेरे गीत मिटाते आये, ईर्ष्या नफरत,दंगा, भीत ||

9 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति,..

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  2. हा-हा-हा मस्त है!

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  3. क्या बात है...बहुत खूब

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  4. पाजामा में हंगामा बहुत खूब जी !

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  5. रविकर पहली डेट, बना दी मुझको मामा ।
    करे नया आखेट, भागती खींच पजामा ।।
    मेरे गीत सिखाते आये, दुनिया की हर सुन्दर रीत |
    मेरे गीत मिटाते आये, ईर्ष्या नफरत,दंगा, भीत ||
    अति उत्कृष्ट अनु -टिप्पणियाँ कह गएँ हैं आप भाई साहब .हर मर्तबा आंचलिक शब्दार्थ दिया करें एक अंचल से दूसरे तक पहुँचते पहुँचते इनके अर्थ बदल जाते हैं .शुक्रिया मसलन जामा भेष को भी कह दिया जाता है ..कृपया यहाँ भी पधारें -
    बुधवार, 9 मई 2012
    शरीर की कैद में छटपटाता मनो -भौतिक शरीर
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    आरोग्य समाचार
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_09.हटमल
    क्या डायनासौर जलवायु परिवर्तन और खुद अपने विनाश का कारण बने ?
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    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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  6. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से शुभकामनाएँ।

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