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Tuesday, 12 June 2012

जौ-जौ आगर ब्लॉग, बड़े सब रत्ती-रत्ती-

कार्टून :- आप इनमें से कौन से वाले ब्‍लॉगर हैं ?


आपत्ती पर जील की, इक फोटो दी डाल ।
तैंतिस प्रतिशत कीजिए, करिए नहीं बवाल ।

करिए नहीं बवाल, बड़ी संख्या है भाई ।
घोटूं मुँह में राल, नजर रविकर ललचाई ।

जौ-जौ आगर ब्लॉग, बड़े सब रत्ती-रत्ती ।
पुरस्कार पा जाय, उन्हें फिर क्या आपत्ती ??



ललचाय रही लुच्ची लीची, मन सबका भरमाये ।
प्राची प्रांजल को बाबा जी, लाकर खूब खिलाये ।|
देहरादून उत्तरांचल की, लीची लेकिन खट्टी- 
यह रविकर धनबाद बसा है, कैसे लीची खाए ??

संतोष त्रिवेदी
संतोष त्रिवेदी updated his status: "हमने जब भी सोचा,बुरा सोचा, उसने जब भी नोचा,सही नोचा ! (निर्मल-हास्य)"
रविकर पोचा जब भी सोचा, बुरा  बुरा ही सोचा |
मन का बागी बिना बिचारे, खाँख खाँख कर कोंचा |
दर्द मर्द का बाहर आया, बहा रक्त का दरिया -
आँखें विस्फारित सजनी की, जगह जगह से नोचा ||


मास्‍साब शोर बहुत मचाते हैं
बड़े नवाबों ने किया, बढ़िया और जुगाड़ ।
रोटी पूरी खा रहे, चिकन का कुर्ता झाड़ ।।

9 comments:

  1. स्त्री की फोटू देख जिया रविकर ललचाया,
    या पुरस्कार को भांप राल उसके मुँह आया!

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    1. अभी तलक मन भावन फोटू, कार्टून न पाया |
      पुरस्कार की खातिर रविकर, मन नादाँ ललचाया ||

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    2. पुरस्कार पाने के खातिर न हो इतने आधीर
      लाइन में मै भी लगा हूँ,रखे ह्रदय में "धीर"

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  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  3. कहाँ-कहाँ से खींच-खांच कर लाते रविकर,
    सबके बस का नहीं ,नोचना सबसे दुष्कर :-)

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  4. शायद इस ब्‍लॉग पर मैं पहली बार आया हूं ☺ अच्‍छा लगा

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  5. वाह...
    बहुत खूब!
    अच्छी भावाभिव्यक्तियाँ है।

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  6. Dinesh ji, I'm really mesmerized by your witty mind and awesome creations. The more I read you , the more I admire.

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  7. रसीली चर्चा ...आभार आपका !

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