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Saturday, 30 June 2012

मौत-जिंदगी हास्य-व्यंग, क्रमश: साँझ- विकाल

जीने-मरने में क्या पड़ा है, पर कहने-सुनने...

यादें....ashok saluja .
यादें...  
यात्रा का मंचन करे, प्राण पड़े कंकाल ।
मौत-जिंदगी हास्य-व्यंग, क्रमश: साँझ-विकाल ।

क्रमश: साँझ-विकाल, मस्त होकर के झूमें।
देते व्यथा निकाल, चक्र-चौरासी घूमें ।

पर्दा गिरता अंत, बिछ्ड़ते  पात्र-पात्रा ।
किन्तु चले निर्बाध, कहीं ना रुके यात्रा  ।। 


पंज -प्यारो  के चित्र  पर, करते  हो  खिलवाड़ |
मैया हो जाये  खपा, बहुत पड़ेगी झाड़ |
 
बहुत पड़ेगी झाड़, देखिये पहला लालू |
ममता को भटकाय, मुलायम दूजा चालू |
 
तीजा वोही  बंग , दाहिने  लुंगी  वाला  |
पी  एम्  पीछे  हाथ, छुपाता मन का काला ||

ज्यादा देर आन लाइन रहना बोले तो टेक्नो ब्रेन बर्न आउट



कितनो समझाओ यहाँ, अनुभव लेख उड़ेल ।
मल्टी-टास्किंग का सदा , किया करेंगे खेल  ।

किया करेंगे खेल , रेल का डिब्बा जनरल ।
सौ ठो देंगे पेल, झेल जायेगी अक्कल ।

जल ही जाय दिमाग, आउट  हो जाए  टेक्नो ।
अपनी ढपली राग, यहाँ समझाओ कितनो ।।

गंगा चित्र-7

देवेन्द्र पाण्डेय 
पक्षी दाना चुग रहे, मुर्गा है तैयार ।
बारी गंगा-लाभ की, जाना सागर पार ।
 
जाना सागर पार, बनारस घूम सकारे ।
हो जाए उद्धार, मनौती गंग किनारे ।

मानव देश-विदेश, आय के महिमा जाना ।
खाय उड़े परदेश, आत्मा पक्षी दाना ।।

वेदों के देश भारत में आयुर्वेद की दशा

ZEAL at ZEAL 
रोगी की सम्पूर्ण चिकित्सा, रक्षित होय निरोगी ।
आयुर्वेद पूर्ण सक्षम है, निन्दा करते ढोंगी ।
सुश्रुत शल्य-क्रिया धन्वंतरि, औषधि के विज्ञाता
वैदिक ज्ञान प्रतिष्ठित होगा, फिर से जय जय होगी ।।


6 comments:

  1. गजब की टिप्पणियां ! चार चाँद लगा दिला पोस्टों पर।

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  2. आपका पोस्ट पर कुंडली कमेंट करने का अभ्यास चमत्कृत करता है। इस पुन्य का लाभ एक दिन आपको अवश्य मिलेगा।

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  3. ये कैसे पता चल पायेगा
    रविकर किस पोस्ट पर
    कौन सी कुण्डली चिपकायेगा?
    इतना राशन ये पता तो
    चलाईये कि कहाँ से उठायेगा?

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  4. अद्भुत और त्वरित है कुंडलियों के माध्यम से टिप्पणियाँ .. बहुत खूब

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  5. बढ़िया प्रस्तुति |

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