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Thursday, 14 June 2012

ममतामयी मुलामियत, मनमोहनी मिजाज-

कार्टून:- ये हुआ कल


ममतामयी मुलामियत, मनमोहनी मिजाज |
अपना खूंटा गाड़ते, हैं इसमें क्या राज ?

हैं इसमें क्या राज, लाज की सोनी कुड़ियां |
देख बिगड़ते काज, भेंटती पैकेज पुड़ियाँ |

बंग करे न तंग, प्रांत उत्तर उत्तमता |
रह जायेंगे दंग, बड़ी बरसेगी ममता ||


  कार्टून:- लो और सुनो...

स्वामी स्वामी राष्ट्र के, अच्छी नेक सलाह ।
बड़े मुकदमें बंद हों, वाह वाह वल्लाह ।
वाह वाह वल्लाह , नया मनमोहन पाओ ।
मन-माफिक हो राह, मुहर मन भर लगवाओ ।
कर रविकर आगाह,  किया बाबा बदनामी ।
ताक -झाँक का शाह, बड़ा नटखट है स्वामी ।।

सूर्य किरणों द्वारा अग्नि वर्षा कब तक?

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गरज हमारी देख के,  गरज-गरज घन खूब ।
बिन बरसे वापस हुवे, धमा-चौकड़ी ऊब ।
 
धमा-चौकड़ी ऊब, खेत-खलिहान तपे हैं ।
तपते सड़क मकान, जीव भगवान् जपे है ।

त्राहिमाम हे राम, पसीना छूटे भारी ।
भीगे ना अरमान, भीगती देह हमारी ।। 

2 comments:

  1. राजनीति और मौसम की गर्मी...!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (16-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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