Follow by Email

Friday, 6 July 2012

सदा खिलाना गुल नया, नया कजिन मुसकाय-


करे बहाना आलसी,  अश्रु बहाना काम |
होय दुर्दशा देह की,  जब से लगी हराम  ।।

अन्न पकाना छोड़ दी, कान पकाना रोज   |
सास-बहू में पिस रहा, अभिनेता मन खोज ।।

दही जमाना भूलती, रंग जमाना याद |
करे माडलिंग रात-दिन, बढ़ी मित्र तादाद ||

पुत्र खिलाना भाय ना, निकल शाम को जाय |
सदा खिलाना गुल नया,  नया कजिन मुसकाय ||


5 comments:

  1. क्या बात है,जम क रबरस रहे हैं महिलाओं पर?

    ReplyDelete
  2. वाह‍ ... बेहतरीन

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (08-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete