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Saturday, 4 August 2012

पर्वत करने लगे ईर्ष्या, देख पेड़ की बढ़ी उंचाई-रविकर

फ्रेंड बड़ा सा शिप लिए, रहे सुरक्षित खेय |
चलें नहीं पर शीप सा, यही ट्रेंड है गेय |
यही ट्रेंड है गेय, बिलासी बुद्धि नाखुश |
गलत राह पर जाय, लगाए रविकर अंकुश |
दुःख सुख का नित साथ, संयमित स्नेही भाषा |
एक जान दो देह, यही है फ्रेंड-पिपासा  ||

 
उम्मीद से है दरख़्त अब

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संध्या आर्या

आज जड़ों को ट्रीटमेंट की, बड़ी जरुरत है भाई |
पर्वत करने लगे ईर्ष्या , देख पेड़ की बढ़ी उंचाई |
गहराई में जड़े जा घुसीं, बहुतों को यह रास न आया |
करे दिखावा ढोंगी सारे, चाट रहे दीमक की नाईं ||


भ्रम
जो मेरा मन कहे

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur)

 झूठ-सांच की आग में, झुलसे अंतर रोज |
किन्तु हकीकत न सके, नादाँ अब तक खोज |

नादाँ अब तक खोज, बड़े वादे दावे थे |
राष्ट्र-भक्ति के गीत, सुरों में खुब गावे थे |

दृष्टि-दोष दम फूल, झूल रस्ते में जाते |
भूले सही उसूल, गलत अनुसरण कराते ||

काजल कुमार के कार्टून
कार्टून :- चाय के प्‍याले में तूफ़ान


 कुलबुलाय कीड़ा-कपट, बेईमान इंसान ।
झूठ स्वयं से बोल के, छोड़ हटे मैदान |

छोड़ हटे मैदान, डटे थे बड़े शान से |
बार बार आमरण, निकाले खड्ग म्यान से |

अनशन अब बदनाम, महात्मा गांधी अन्ना |
खड्ग सिंह विश्वास, टूटता मिटी तमन्ना |



भगत सिंह अशफाकुल्ला,  बापू जैसी कहाँ आत्मा |
आँख मूंद कर पीछे लाखों, आन्दोलन का किन्तु खात्मा |

आशावादी जन गन सारा, लेकिन नेता नहीं भरोसा |
जीना हरदिन कठिन हो रहा, खड़ा झूठ का उच्च आसमाँ ||

 
अख़बार

मेरा फोटो

मुकेश कुमार सिन्हा

 असहनीय बंदिशें सही हैं,
जुल्मों की इंतिहा हुई है |
सदियों से अपमान-ताड़ना,
कडुवे-कडुवे घूँट गटकती |
 
नारी जागी-मिला समर्थन,
आज मीडिया भी व्यापारी -
खबर मसाले दार बना के,
चटकारे ले खूब कही है ||



बन्दर मोर हिरन चमगीदढ़, 
मैना सारस तितली रानी |
हरा-भरा यह उदय शहर है, 

सरल-चित्र की मूक बयानी |
फूल पत्तियों काँटों की भी,

 रानी के संग बनी कहानी |
फोटोग्राफर साधुवाद है,

 दाद दे रही रविकर वाणी ||

खेल में अमेरिकी गुंडागर्दी

 
बाक्सिंग बाउट का रिजल्ट, हो विकास की हार |
ओबामा तू मित्र कस, भारत से कस प्यार ?

भारत से कस प्यार, सैकड़ों मेडल तेरे |
कैसे पूरूं चार, फैसले बदले मेरे |

एमेच्योर यह संघ, करे हर दिन मनमानी |
खारिज करे अपील, सुने न राम कहानी || 
(2)
हिंदी चीनी फिर हुवे, भाई भाई राम |
कांस्य-पदक के खेल में, प्लेयर हो नाकाम |

प्लेयर हो नाकाम, जिताती है भारत को |
अमरीका उद्दंड, यहाँ जितना भी बक्को |

मनमानी का राज, राज सभी खेलों में |
अंधा है कानून, अकड़ भरता चेलों में ||

9 comments:

  1. दोस्ती का दिन मुबारक हो !

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  2. फ्रेंड बड़ा सा शिप लिये रहे सुरक्षित खेय..वाह!

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  3. आपको मित्रता दिवस शुभकामनाएं ...

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  4. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 06-08-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-963 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  5. मित्रता दिवस की शुभकामनाएं ...

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  6. .आने दो नौ तारीक (तारीख )दिव्या ,आग लगेगी दिल्ली में ,.......भाग मचेगी दिल्ली में ,साम्राज्ञी अब चुप्पा तोड़ो ,आग लगेगी दिल्ली में ....,नहीं चलेगा पीज़ा मेरी दिल्ली में ....._______________
    लिंक 14-
    केवल बुद्धिविहीन भारतीयों के लिए एक पोस्ट -दिव्या श्रीवास्तव ZEAL
    ram ram bhai

    ram ram bhai
    सोमवार, 6 अगस्त 2012
    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

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  7. बन्दर मोर हिरन चमगीदढ़,
    मैना सारस तितली रानी |
    हरा-भरा यह उदय शहर है,
    सरल-चित्र की मूक बयानी |
    फूल पत्तियों काँटों की भी,
    रानी के संग बनी कहानी |
    फोटोग्राफर साधुवाद है,
    दाद दे रही रविकर वाणी ||
    दिनेश की दिल्लगी ,दिल की लगी बन जाती है ,एक साथ दुनिया का दर्द लिए आती है ,बढ़िया कैनवास बटोरा है इस प्रस्तुति ने सार निचोड़ा है आलेखों (मूल )का .
    ram ram bhai

    ram ram bhai
    सोमवार, 6 अगस्त 2012
    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

    ReplyDelete