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Friday, 3 August 2012

छाया सन्नाटा अटल, तम्बू-टेंट उखार -

 

"बाहर कर लिया /अब अंदर जायेंगे "


माथा भन्नाता विकट, हजम करारी हार |
छाया सन्नाटा अटल, तम्बू-टेंट उखार | 

तम्बू-टेंट उखार, खार खाए थी सत्ता |
हफ़्तों का उपवास, हिला न कोई पत्ता |

कांगरेस की जीत, निरंकुश उसे बनाए |
राजनीति की दौड़, अगर अन्ना लगवाये ||

कुलबुलाय कीड़ा-कपट, बेईमान इंसान ।
झूठ स्वयं से बोल के, छोड़ हटे मैदान |  

छोड़ हटे मैदान, डटे थे बड़े शान से |
बार बार आमरण, निकाले खड्ग म्यान से |

अनशन अब बदनाम, महात्मा गांधी अन्ना |
खड्ग सिंह विश्वास, टूटता मिटी तमन्ना ||

ZEAL  

राष्ट्र कार्य करने चले, किन्तु मृत्यु भय साथ |
लगा नहीं सकते गले, फिर ओखल क्यूँ माथ ?


फिर ओखल क्यूँ माथ, माथ पर हम बैठाए |
देते पूरा साथ, हाथ हर समय बढाए |


आन्दोलन की मौत, निराशा घर घर छाई |
लोकपाल की करें, आज सब पूर्ण विदाई ||



7 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (04-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. वाह क्या इक्ट्ठा कर लिये
    सारे के सारे एक साथ
    अब चलो निकालो हंडिया
    और पकायेंगे हम भात !

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  3. नायक से खलनायक,आज बन गए है अन्ना
    गाँव रालेगनसिद्धी जा के, बैठकर चूसे गन्ना,,,,

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  4. कैसी शोचनीय स्थिति - साबुन के बुलबुले उठे,जरा हवा लगी बैठ गये ! !

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  5. aaka bhee jawab nahi hai.bahut hee shandaar

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  6. चलो अन्ना का साथ दें....
    सादर।

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