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Wednesday, 12 September 2012

शिशु जागे जागे है माता, शिशु सोवे फिर भी जगता मन-


अपने ही दिल का सताया हुआ हूँ

गम का मरहम ले लगा, अगर दगा यह जिस्म |
रब का पहरा ले बचा, किया वहम किस किस्म |

किया वहम किस किस्म, अश्क के सागर नागर |
शेरो में भर दिया, गजब का भाव बिरादर |

करता किन्तु सचेत, फैक्टरी उनकी चालू |
चालू गम निर्माण, रवैया बेहद टालू ||



कुछ रिश्‍ते ...(2)

सदा at SADA  
1
माता मारक हो जाती है जब भी खतरा हो बच्चों पर |
ये ही सबसे सच्चा रिश्ता, साबित होता हर अवसर पर |
2
जर जमीन बट जाती है जब, गला काट दुश्मनी निभाते |
रिश्ते तो मर जाते लेकिन, दो भाई इक बाप कहाते ||
3
पहला पहला प्यार अनोखा, अल्प समय का साथ सिखाये |
इस दुनिया में आकर अपना, हम सब कैसे समय बिताये ||
4
महा स्वार्थी लोलुप बन्दे इस दुनिया में भरे पड़े हैं |
हर रिश्तों को बेंच सके वे, मदद मांगिये हाथ खड़े हैं ||


सृजन

प्रवाह at नव - उद्गार

 शिशुताई से ताई माई, बुआ मौसियाँ है हर्षित जब ।
माँ का पारावार नहीं है, कितनी हर्षित होती है तब ।
शिशु में उसके प्राण बस रहे, शिशु के वश में माँ का जीवन ।
 शिशु जागे जागे है माता, शिशु सोवे फिर भी जगता मन ।
दिन भर भागदौड करती है, रक्त जलाए दूध पिलाए ।
पर न कोई गिला शिकायत, गीला तन घूमें घर आँगन ।।
त्याग तपस्या की प्रति-मूरत, रविकर करे प्रणाम मातु को-
माँ की महिमा अगम अगोचर, शिशु ही उसका तीरथ उपवन ।

मेरे सपनों का भारत

सपनों का भारत दिखे, लिखे मुँगेरी लाल |
रुपिया बरसे खेत में, घर में मुर्गी दाल |
घर में मुर्गी दाल, चाल सब चलें पुरातन |
जर जमीन जंजाल, बजे हर घर में बरतन |
चचा भतीजावाद, राज भी हो अपनों का |
बझा रहे हर जंतु, यही भारत सपनों का ||

नादानियां असीम हैं, शैतानी मकबूल-

चित्रण माँ से रेप का, जाए रविकर झेंप |
जंग लंग गौरांग तक, गजनी दुश्मन खेंप |
गजनी दुश्मन खेंप, बाल न बांका होवे |
देख दुर्दशा किन्तु, वही भारत माँ रोवे |
अगर गुलामी काल, मानते लाज लुटी है |
नाजायज औलाद, वही तो आज जुटी है ||



5 comments:

  1. आपका बहुत - बहुत आभार रविकर जी

    सादर

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  2. टिप्पणी करने के लिए सभी कुणडलियाँ बहुत बढ़िया रचीं हैं आपने!

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  3. बहुत सुंदर कुण्डलियाँ वाह !

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  4. सबके ख़याल माँ जैसे नहीं हो सकते.
    माँ अज़ीम है.

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  5. आदरणीय रविकर बेहद सुन्दर तरीके से आप अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं. मेरी रचना को इस लायक समझा आपने बहुत-२ शुक्रिया

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