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Wednesday, 5 September 2012

इटेलियन सैलून में, कटा सिंह नाखून-



इटेलियन सैलून में, कटा  सिंह नाखून ।
भारी भोलापन पड़ा, लगा देश को चून ।
लगा देश को चून, नून जख्मों पर छिड़का ।
करते गंडा-गोल, तभी जी डी पी लुढका ।
है दैनिक विज्ञप्ति, आज भी सहें इंडियन ।
किया पुन: ब्रेक-फास्ट , पीजा मिला इटेलियन ।

 
इटेलियन सैलून में, कटा सिंह नाखून |
पुत्र जन्म पर बट चुका, सन पैतिस में चून |
सन पैतिस में चून, मोहिनी सूरत भाई |
भाई को बहलाय, लकड़ सुंघा बुलवाई |
लकड़ी दिया सुंघाय, आज कोयला हो जाता |
छक्के अमृत-पान, सुबह से पीजा खाता || 


नारी शक्ति :भर लो झोली सम्पूरण से

Virendra Kumar Sharma
ram ram bhai

 चुस्त धुरी परिवार की, पर सब कुछ मत वार |
देहयष्टि का ध्यान कर, सेहत घर-संसार |
सेहत घर-संसार, स्वस्थ जब खुद न होगी |
सन्तति पति घरबार, भला हों कहाँ निरोगी ?
संरचना मजबूत, हाजमा ठीक  राखिये |
सक्रिय रहे दिमाग, पदारथ सकल चाखिये ||

परिकल्पना-सम्मान और अपमान !

संतोष त्रिवेदी
नुक्कड़

नुक्कड़ पर हो भर्त्सना, सही संतुलित शब्द |
अच्छाई सह खामियाँ, देखें लिखे दशाब्द |
देखें लिखे दशाब्द, चूक को माफ़ कीजिये |
अनियमतायें व्याप्त, सभी दायित्व लीजिये |
कह रविकर करजोर, बनों न मित्रों थुक्कड़ |
लो कमियों से सीख, करो जगमग फिर नुक्कड़ ||
 


 
आचार्य परशुराम जी 

ताल पुराना पाय के, दादुर करे गुड़ूप |
टर्राता टर टर टिकत, छोड़े अपना कूप |
छोड़े अपना कूप, मित्रता भाव निभाते |
एक कुंए की बात, बैठ के मन बहलाते |
करे प्रशंसा ढेर, बहुत आये फुदकाना |
पहली पहल सवेर, देखता ताल पुराना ||


एक में अनेक !

मोर,खरगोश,कछुआ,सांप,शेर 


पंचमेल खिचड़ी पकी, मजेदार स्वादिष्ट |
क्यूँकर व्यर्थ खरचना, श्वेत चार ठो पृष्ट |
श्वेत चार ठो पृष्ट, सर्प रह रह फुफकारे |
कछुवे की हो जीत, हारता शशक दुबारे |
मोर मोइनी सोनि, पटाले सिंह मोहना |
सर्कस चालू अहे, छोडिये  बाट जोहना ||
 उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक  <a href="http://dineshkidillagi.
blogspot.in/"> लिंक-लिक्खाड़ </a>  पर  है ।।

11 comments:

  1. वाह ... बेहतरीन

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  2. नुक्कड़
    नुक्कड़ पर हो भर्त्सना, सही संतुलित शब्द |
    अच्छाई सह खामियाँ, देखें लिखे दशाब्द |
    देखें लिखे दशाब्द, चूक को माफ़ कीजिये |
    अनियमतायें व्याप्त, सभी दायित्व लीजिये |
    कह रविकर करजोर, बनों न मित्रों थुक्कड़ |
    लो कमियों से सीख, करो जगमग फिर नुक्कड़ ||
    बढिया सीख देती टिपण्णी .

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  3. फैजाबादी जी, मनोज ब्लॉग पर आँच-119 परशुराम राय द्वारा लिखी पोस्ट है। वैसे फोटो परशुराम राय की और नाम हरीश प्रकाश गुप्त जी लगा दिया है आपने। एक बार पुनः पोस्ट एवं विवरण देखें।

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  4. भाई,,,,बहुत खूब,,,,,बेहतरीन प्रस्तुति,,,,,

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  5. सही कह रहे हो भाई !

    आभार आपके स्नेह का !

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  6. आप स्वयं तो उम्दा लिखते ही हैं, अन्य ब्लॉगर्ज़ के कथ्य को आत्मसात करके लिखने की आपकी फैकल्टी भी कमाल है. शुभकामनाएँ आपके लिए.

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