Follow by Email

Tuesday, 4 December 2012

वर्षगाँठ कामना, रहे शुभ प्यार निखालिस

 

चालिसवीं वर्षगाँठ पर शुभकामनायें -

 
चालिस-चालिस शेर के, दो मन होते एक ।
अमर रहे यह युगल-निधि, रूप भारती नेक ।
रूप भारती नेक, बैठ  गंगा के तट पर ।
कुल-संकुल इक संग, दमकता चेहरा रविकर ।
वर्षगाँठ  कामना,  रहे शुभ प्यार निखालिस ।
स्वस्थ देह मन मुदित, चालिसा रचिए चालिस ।।


My PhotoMy Photo




अरुण कुमार निगम
दोनिया पंचामृत भरी, दोना भरा प्रसाद |
भोग लगाओ प्रेम से, होवे मंगल-नाद |
होवे मंगल-नाद, शंख शुभ झांझर बाजे |
मनभावन श्रृंगार, मांग में सिंदूर साजे ||
बना रहे अहिवात, जियो हे सुयश सोनिया |
कर पंचामृत पान, अँजूरी धरो दोनिया ||


Can Vitamin C Help My Immune System ?

Virendra Kumar Sharma 

ताजे फल तरकारियाँ, नींबू मिर्ची तीक्ष्ण |
करिए नित व्यायाम भी, नियमित सेहत वीक्ष्ण |
नियमित सेहत वीक्ष्ण, रोग रोधी होती है |
टूट-फूट कोशिका, इन्हें भी संजोती है |
रखिये अपना ख्याल, समझिये जरा तकाजे |
गर्म दुशाला डाल, रहो बन हरदम ताजे ||

गीर अभ्यारण : शेर ही शेर

महेन्द्र श्रीवास्तव  
आधा सच...
संसद से चालू सड़क, धड़क धड़क गिरि जाय |
कुत्तों से ही अनगिनत, रविकर झुण्ड दिखाय  |
रविकर झुण्ड दिखाय, इन्हें भी सिंह कहे हैं-
होकर राजा श्रेष्ठ, शेरनी-जुल्म सहे हैं |
रहे बोलती बंद, प्रफुल्लित हम हैं बेहद |
जारी है दृष्टांत, देखनी यह भी संसद ||



 हरि अनंत हरी कथा अनंता !!!

Sonal Rastogi 

करने को तो बहुत है, पर बढ़िया यह काम ।
आस-पास जो भी रहे, जीना करो हराम ।
जीना करो हराम, सामने मधु की गोली ।
पीछे हों षड्यंत्र, जहर जीवन में घोली ।
धारावाहिक सार, चलो सब सजे संवरने ।
कोई भी त्यौहार, बहू को सारे करने ।।

कार्टून कुछ बोलता है- पैरेंट्स व्यथा !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" 

आयर-लैंडी भ्रूण हो, हो असमय नहिं मौत ।
बचपन बीते नार्वे, मातु-पिता गर सौत ।
मातु-पिता गर सौत, हेकड़ी वहां भुला दे ।
यू के में पढ़ युवा, सेक्स ब्राजील खुला दे ।
शादी भारत आय, सके नहिं लेकिन कायर ।
बिता बुढापा जाय, सही सबसे है आयर ।।

6 comments:

  1. बेहतरीन लिंक्‍स के साथ उम्‍दा प्रस्‍तुति

    आभार

    ReplyDelete
  2. शुभ विवाक पद पर काव्य सौन्दर्य देखते ही बनता है .बधाई इधर भी उधर भी .

    ReplyDelete
  3. शुभ कामनाएं ब्लॉग परिवार की .सुयश पायें सुमंगल गायें ,जग जग जिए प्रसंन्न वदना जुगल .

    दोनिया पंचामृत भरी, दोना भरा प्रसाद |
    भोग लगाओ प्रेम से, होवे मंगल-नाद |
    होवे मंगल-नाद, शंख शुभ झांझर बाजे |
    मनभावन श्रृंगार, मांग में सिंदूर साजे ||
    बना रहे अहिवात, जियो हे सुयश सोनिया |
    कर पंचामृत पान, अँजूरी धरो दोनिया ||

    ReplyDelete
  4. शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन

    ReplyDelete