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Tuesday, 29 October 2013

खुदा देश की नींव, लगाते दुष्ट कहकहा -

Politics में शेर और भेड़ियों के बीच अन्डरस्टैंडिन्ग

DR. ANWER JAMAL 
 कहानियाँ देते सुना, भुना रहे प्रोनोट |
दूजे को लगता सदा, पहले में है खोट |

पहले में है खोट, पोट कर रखते वोटर |
कठफुड़वा की टोंट, बना देती है कोठर |

बैठे हिंसक जीव, चला गठजोड़ आ रहा |
खुदा देश की नींव, लगाते दुष्ट कहकहा ||

सत्य वचन थे कुँवर के, आज सुवर भी सत्य |
दोष संघ पर दें लगा, बिना जांच बिन तथ्य | 

बिना जांच बिन तथ्य, बड़े बडबोले नेता |
हुई सभा सम्पन्न, सभा के धन्य प्रणेता |

बीता आफत-काल, हकीकत आये आगे |
फिर से खड़े सवाल, किन्तु सुन नेता भागे ||













बोले थे जो जनार्दन, दिखे वही छल छंद । 
शहजादे कहना नहीं, करूँ अन्यथा बंद । 

करूँ अन्यथा बंद, लगेंगे दो दिन केवल। 
आइ यस आई लिंक, बना लेता क्या सम्बल । 

हो पटने में ब्लास्ट, जहर मानव-बम घोले । 
पर बच जाता मंच, पुन: मोदी यह बोले ॥  

परंपरा --

Indu Kalkhande 
चालू म्यूजिक लॉन्च पर, तू कर रैली बंद |
आतंकी उद्देश्य सा, बकते मंत्री चन्द |

बकते मंत्री चन्द, अगर भगदड़ मच जाती |
मरते कई हजार, भीड़ भी फिर गुस्साती |

तोड़ फोड़ धिक्कार, हँसे आतंकी-खालू |
यह कैसा व्यवहार, मंत्रि-परिषद् अति चालू || 


घटना करते थे कहीं, शरण यहाँ पर पाय |
भटकल क्या पकड़ा गया, जाती बुद्धि नशाय |

जाती बुद्धि नशाय, हिरन झाड़ी खा जाए |
मारे तीर नितीश, नजर तू जैसे आये |

बोध गया विस्फोट, व्यर्थ दहलाया पटना |
रे आतंकी मूर्ख, आत्मघाती ये घटना || 

कितनी छिछली हरकतें, कर आयोग विचार-

कार्टून :- चुनाव चि‍न्‍ह के खेल


तालाबों को ढक रहे, हाथी पिछली बार |
कितनी छिछली हरकतें, कर आयोग विचार |

कर आयोग विचार, किसानों की यह खेती |
मधुमक्खी मकरंद, इन्हीं कमलों से लेती |

दिखी कांग्रेस धूर्त, कलेजा कितना काला |
पंजा दे कटवाए, साइकिल में भी ताला || 



हिन्‍दुस्‍तान में हिन्‍दू होने की सजा

Vikesh Badola



सीधे जाना काम पर, घर आना चुपचाप |
देरी होती है अगर, जाय कलेजा काँप |
जाय कलेजा काँप, देवता सभी मनाऊँ  |
अति-चिंतित माँ बाप, लौट कर जब तक आऊँ |
बचपन से दी सीख, कहीं काँटा जो बीधे |
कर के उसे प्रणाम, लौट घर आना सीधे ||

पैरो के नीचे कही, चीटी भी गर आय |
उसे बचाकर निकलिए, पैर नहीं पड़ जाय |
पैर नहीं पड़ जाय, जीव को नहीं सताओ |
जो भूखे असहाय, उन्हें रोटियां खिलाओ |
धर्म भीरु बन जाय, हिन्दु क्या छुरी भोंके |
खुद को किन्तु बचाय, स्व्यं को चुप्पै रोके ||



6 comments:

  1. बहुत सुंदर सूत्र संकलन !

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  2. टिप्पणियों में शानदार ढ़ंग से भाव प्रकट करते हैां
    रविकर जी आप तो।

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  3. सत्य वचन थे कुँवर के, आज सुवर भी सत्य |
    दोष संघ पर दें लगा, बिना जांच बिन तथ्य |

    बिना जांच बिन तथ्य, बड़े बडबोले नेता |
    हुई सभा सम्पन्न, सभा के धन्य प्रणेता |

    बीता आफत-काल, हकीकत आये आगे |
    फिर से खड़े सवाल, किन्तु सुन नेता भागे ||

    रविकर के लेखन की आंच दिनों दिन प्रखर होती जाए रे

    ReplyDelete
  4. सत्य वचन थे कुँवर के, आज सुवर भी सत्य |
    दोष संघ पर दें लगा, बिना जांच बिन तथ्य |

    बिना जांच बिन तथ्य, बड़े बडबोले नेता |
    हुई सभा सम्पन्न, सभा के धन्य प्रणेता |

    बीता आफत-काल, हकीकत आये आगे |
    फिर से खड़े सवाल, किन्तु सुन नेता भागे ||

    रविकर के लेखन की आंच दिनों दिन प्रखर होती जाए रे

    तालाबों को ढक रहे, हाथी पिछली बार |
    कितनी छिछली हरकतें, कर आयोग विचार |

    कर आयोग विचार, किसानों की यह खेती |
    मधुमक्खी मकरंद, इन्हीं कमलों से लेती |

    दिखी कांग्रेस धूर्त, कलेजा कितना काला |
    पंजा दे कटवाए, साइकिल में भी ताला || बहुत खूब कह जाए हमारा सब रविकर कविराय।

    ReplyDelete
  5. सत्य वचन थे कुँवर के, आज सुवर भी सत्य |
    दोष संघ पर दें लगा, बिना जांच बिन तथ्य |

    बिना जांच बिन तथ्य, बड़े बडबोले नेता |
    हुई सभा सम्पन्न, सभा के धन्य प्रणेता |

    बीता आफत-काल, हकीकत आये आगे |
    फिर से खड़े सवाल, किन्तु सुन नेता भागे ||

    रविकर के लेखन की आंच दिनों दिन प्रखर होती जाए रे

    तालाबों को ढक रहे, हाथी पिछली बार |
    कितनी छिछली हरकतें, कर आयोग विचार |

    कर आयोग विचार, किसानों की यह खेती |
    मधुमक्खी मकरंद, इन्हीं कमलों से लेती |

    दिखी कांग्रेस धूर्त, कलेजा कितना काला |
    पंजा दे कटवाए, साइकिल में भी ताला ||

    बहुत खूब कह जाए हमारा सब रविकर कविराय।

    जो न आये नित यहाँ सो पाछे पछताय ,

    आओ भाई लिंक लिखाड़ी ,रहो सबसे अ-गाड़ी

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