Follow by Email

Sunday, 31 March 2013

पूतो फलो मनीष, मनीषा अरुण मुबारक-

मनीषा के जन्मदिवस पर गुरुदेव श्री शास्त्री सर का अनमोल उपहार

 
दूल्हा दुलहन को मिले, सबका स्नेहाशीष |
कहता जग दूधो नहा, पूतो फलो मनीष |

पूतो फलो मनीष, मनीषा अरुण मुबारक |
मानवता से प्रेम, युगल हो प्रेम प्रचारक |

रविकर ब्रेक के बाद, पोतता अपना चूल्हा |
होली के पकवान, ग्रहण कर दुलहिन दूल्हा ||

Wednesday, 20 March 2013

बीयर पी पी कोस ले, चल ले ढाई कोस-


सन्देश: 31 मार्च तक ब्लॉग जगत से दूर हूँ-रविकर 
शुभ-होली


पहलवान हो गधा, बाप अब कहे सियासत -



बेचारा रविकर फँसा,  इक टिप्पण आतंक ।
जैसे बैठा सिर मुड़ा, ओले पड़ते-लंक ।  

ओले पड़ते-लंक, करुण कर गया हिमाकत ।
पहलवान हो गधा, बाप अब कहे सियासत

बेनी जाती टूट,  किंवारा खुलता सारा ।
दिखता पर्दा टाट,  हुआ चारा बे-चारा ।


मुर्दा मुद्दा जिया, हिलाता देश तमिलियन

मिलियन घपले से डिगी, कहाँ कभी सरकार । 

दंगे दुर्घटना हुवे, अति-आतंकी मार । 

अति-आतंकी मार, ख़ुदकुशी कर्जा कारण । 

मँहगाई भुखमरी, आज तक नहीं निवारण । 

काला भ्रष्टाचार, जमा धन बाहर बिलियन । 

मुर्दा मुद्दा जिया, हिलाता देश तमिलियन ॥ 


Drought in Maharashtra - Government and Beer Companies
@ महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar)





बीयर पी पी कोस ले, चल ले ढाई कोस |
इक मटकी पानी मिला, छिडको आये होश |


छिडको आये होश, जान जनता की अटकी |
दे बयान सरकार, फिरे फिर मटकी मटकी |


है सूखा विकराल, राल घोटो मत डीयर |
बीयर अति-उत्पाद, बैठकी होवे बीयर ||



इटली अब जा चेत, हमें ना लेना हलके-
हलके में घुस कर करे, मछुवारों का क़त्ल |

कातिल इटली जा बसे, नहीं दिखाते शक्ल |

  नहीं दिखाते शक्ल, अक्ल सत्ता गुम जाए |

राजदूत पर रोब, इधर सरकार दिखाए |

  यू पी ए की बॉस, डपटती खूब टहल के |

 इटली अब जा चेत, हमें ना लेना हलके ||



सम-लैंगिकता खुश हुई, बोले जय सरकार    

(ब्वायज-मेस की चर्चा पर आधारित )
लड़के भूले नैनसुख, प्रेम-धर्म तकरार। 

सम-लैंगिकता खुश हुई, बोले जय सरकार । 
 

  बोले जय सरकार, चले वो गली छोड़ के । 

अफ़साना नाकाम,  मजे में मोड़ मोड़ के । 


जमानती नहिं जुल्म, व्यर्थ झंझट में पड़के । 

हवालात की बात, बड़ा घबराते लड़के ॥ 


My ImageAuthor अरुण कुमार निगम
जल है तो है कल सखे, जल बिन जग जल जाय |
कल बढ़ते कल-कल घटे, कल-बल कलकलियाय |

कल-बल कलकलियाय, खफा कुदरत हो जाती |
कुल कलई खुल जाय, हकीकत जीवन खाती |

मनु-जल्पक जा चेत, यही जल तो सम्बल है |
जग-जलसा तब तलक, शुद्ध जब तक यह जल है ||

कल=कल-कारखाना
कल-बल=दांव-पेंच
कलकलियाय = क्रोध बढाए  
 जल्पक=बकवादी




कौशिक सुनहुँ मंदु यहि बालक |
 संकट-कारक करुण कुचालक  |
यू पी घूमा बाँह चढ़ाए  | 
नहीं मुलायम धरती पाए |

माया महा ठगिन हम जानी | 
चर्चित सत्ता रही कहानी |
यही बने अब जीवन-दाता | 
पूजो बेटा पूजो माता ||

Tuesday, 19 March 2013

कौशिक सुनहुँ मंदु यहि बालक-






कौशिक सुनहुँ मंदु यहि बालक |
 संकट-कारक करुण कुचालक  |
यू पी घूमा बाँह चढ़ाए  | 
नहीं मुलायम धरती पाए |

माया महा ठगिन हम जानी | 
चर्चित सत्ता रही कहानी |
यही बने अब जीवन-दाता | 
पूजो बेटा पूजो माता ||

मुर्दा मुद्दा जिया, हिलाता देश तमिलियन

मिलियन घपले से डिगी, कहाँ कभी सरकार । 
दंगे दुर्घटना हुवे, अति-आतंकी मार । 

अति-आतंकी मार, ख़ुदकुशी कर्जा कारण । 
मँहगाई भुखमरी, आज तक नहीं निवारण । 

काला भ्रष्टाचार, जमा धन बाहर बिलियन । 
मुर्दा मुद्दा जिया, हिलाता देश तमिलियन ॥ 

pramod joshi 

इच्छाधारी सर्प हैं, हटे दृश्य वीभत्स |

नाग नाथ को नाथ ले, साँप नाथ का वत्स |


साँप नाथ का वत्स, अघासुर पड़ा अघाया |

हुई मुलायम देह, बहुत भटकाई माया |


मनुज वेश में आय, वोट की मांगे भिक्षा |

सुगढ़ सलोनी देह, होय देने की इच्छा ||

My ImageAuthor अरुण कुमार निगम



जल है तो है कल सखे, जल बिन जग जल जाय |
कल बढ़ते कल-कल घटे, कल-बल कलकलियाय |



कल-बल कलकलियाय, खफा कुदरत हो जाती |
कुल कलई खुल जाय, हकीकत जीवन खाती |



मनु-जल्पक जा चेत, यही जल तो सम्बल है |
जग-जलसा तब तलक, शुद्ध जब तक यह जल है ||

कल=कल-कारखाना
कल-बल=दांव-पेंच
कलकलियाय = क्रोध बढाए  
 जल्पक=बकवादी

किसे चुने हत्यारो और लुटेरों में ?


tarun_kt 


यारा हत्यारा चुनो, बड़े लुटेरे दुष्ट |
टेरे माया को सदा, करें बैंक संपुष्ट |
करें बैंक संपुष्ट, बना देते भिखमंगा |
मर मर जीना व्यर्थ,  नाचता डाकू नंगा |
हत्यारा है यार, ख़याल रख रहा हमारा |
वह मारे इक बार, रोज मत मरना यारा ||



IRFAN

किडनी डी एम के गई, वेंटीलेटर पार । 

इन्ज्वायिंग मेजोरिटी, बोल गई सरकार । 

बोल गई सरकार, बहुत आनंद मनाया । 

त्राहि त्राहि इंसान,  देखना भैया भाया । 

सत्ता का आनंद, हाथ की खुजली मिटनी । 

हाथी सैकिल बैठ, लूट लाएगा किडनी ।

आधुनिक भारत की एक वीरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 400 यात्रियों की जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया।


भारत योगी 

जय जय जय जय नीरजा, चंडीगढ़ की शान |
गन प्वाइंट पे ले चुके, आतंकी इक यान  |


आतंकी इक यान, सभी की जान बचाती |
डाक टिकट सम्मान, शहादत देकर पाती |


यह सच्ची आदर्श, कर्म कर जाती निर्भय |
हे नीरजा भनोट, तुम्हारी जय हो  जय जय ||


आदरणीय प्रतुल जी : आइये

इड़ा पिंगला साध लें, मिले सुषुम्ना गेह ।
बरस त्रिवेणी में रहा, सुधा समाहित मेह ।..

 सुधा समाहित मेह, गरुण से कुम्भ छलकता ।
संगम दे सद्ज्ञान , बुद्धि में भरे प्रखरता  ।

रविकर शिव-सत्संग, मगन-मन सुने इंगला ।
कर नहान तप दान, मिले वर इड़ा-पिंगला। 
 
इंगला=पृथ्वी / पार्वती / स्वर्ग
  इड़ा-पिंगला=सरस्वती-लक्ष्मी (विद्या-धन )

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-24


Drought in Maharashtra - Government and Beer Companies
@ महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar)





बीयर पी पी कोस ले, चल ले ढाई कोस |
इक मटकी पानी मिला, छिडको आये होश |


छिडको आये होश, जान जनता की अटकी |
दे बयान सरकार, फिरे फिर मटकी मटकी |


है सूखा विकराल, राल घोटो मत डीयर |
बीयर अति-उत्पाद, बैठकी होवे बीयर ||

नाग-नाथ को नाथ ले, साँप-नाथ का वत्स






pramod joshi 
इच्छाधारी सर्प हैं, हटे दृश्य वीभत्स |
नाग नाथ को नाथ ले, साँप नाथ का वत्स |
साँप नाथ का वत्स, अघासुर पड़ा अघाया |
हुई मुलायम देह, बहुत भटकाई माया |
मनुज वेश में आय, वोट की मांगे भिक्षा |
सुगढ़ सलोनी देह, होय देने की इच्छा ||

आधुनिक भारत की एक वीरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 400 यात्रियों की जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया।


भारत योगी 

जय जय जय जय नीरजा, चंडीगढ़ की शान |
गन प्वाइंट पे ले चुके, आतंकी इक यान  |


आतंकी इक यान, सभी की जान बचाती |
डाक टिकट सम्मान, शहादत देकर पाती |


यह सच्ची आदर्श, कर्म कर जाती निर्भय |
हे नीरजा भनोट, तुम्हारी जय हो  जय जय ||

वाह वाह ताऊ क्या लात है? में श्री अरविंद मिश्र

ताऊ रामपुरिया 


गुरुवर श्री अरविन्द जी, जिनका धाकड़ ब्लॉग |
वीणा-वादन ब्लॉग पर, साधे ताऊ-राग |
 
साधे ताऊ-राग, फाग में जागे जागे |
गुरु-वाइन का रंग, फिरे हैं भागे भागे |
 
ये ही तो सरकार, ट्रांसफर फर फर रविकर |
विश्वनाथ का नगर, छोड़ के जाते गुरुवर ||

 सोने पे सुहागा
 सुनती कर्ण पुकार है, अब जा के सरकार |
सोलह के सम्बन्ध से, निश्चय हो  उद्धार |

निश्चय हो  उद्धार, बिना व्याही माओं के |
होंगे कर्ण अपार, कुँवारी कन्याओं के |

अट्ठारह में ब्याह, गोद में लेकर कुन्ती |
फेरे घूमे सात, उलाहन क्यूँ कर सुनती ||

पटना पटनायक सरिस, नीति चुने नीतीश |

चालाकी में भैंस से, पड़ते हैं इक्कीस |


पड़ते हैं इक्कीस, सदी इक्कीस भुनाते |

ले विशेष अधिकार, ख़्वाब ये हमें दिखाते |


रविकर से है रीस, उधर चालू है सटना |

दो नावों पर पैर, बड़ा मुश्किल है पटना ||

रविकर शिव-सत्संग, मगन-मन सुने इंगला -कुम्भ-महिमा

 इड़ा पिंगला संग मे, मिले सुषुम्ना देह । 
 बरस त्रिवेणी में रही, सुधा समाहित मेह ।
सुधा समाहित मेह, गरुण से कुम्भ छलकता ।
संगम दे सद्ज्ञान , बुद्धि में भरे प्रखरता 
रविकर शिव-सत्संग, मगन-मन सुने इंगला ।
कर नहान तप दान, मिले वर इड़ा-पिंगला

इंगला=पृथ्वी / पार्वती / स्वर्ग 

  इड़ा-पिंगला=सरस्वती-लक्ष्मी (विद्या-धन )



तिरवेनी थी साथ में, अमर-मुलायम-खान |
एक दूसरे को समझ, सदगुण रहे बखान |
सदगुण रहे बखान, अमर वाणी है रोगी |
बेनी हैं दिग्भ्रमित, सपाई कहते ढोंगी |
रविकर गहरे दोस्त, मारते ठेना ठेनी |
सच्चाई है साफ़, बड़े हैं शातिर वेनी ||


किडनी डी एम के गई, वेंटीलेटर पार । 

इन्ज्वायिंग मेजोरिटी, बोल गई सरकार । 
 

बोल गई सरकार, बहुत आनंद मनाया । 

त्राहि त्राहि इंसान,  देखना भैया भाया । 
 

सत्ता का आनंद, हाथ की खुजली मिटनी । 

हाथी सैकिल बैठ, लूट लाएगा किडनी ।

Monday, 18 March 2013

गुरु-वाइन का रंग, फिरे हैं भागे भागे-


रविकर शिव-सत्संग, मगन-मन सुने इंगला -कुम्भ-महिमा

 इड़ा पिंगला संग मे, मिले सुषुम्ना देह । 
 बरस त्रिवेणी में रही, सुधा समाहित मेह ।
सुधा समाहित मेह, गरुण से कुम्भ छलकता ।
संगम दे सद्ज्ञान , बुद्धि में भरे प्रखरता 
रविकर शिव-सत्संग, मगन-मन सुने इंगला ।
कर नहान तप दान, मिले वर इड़ा-पिंगला

इंगला=पृथ्वी / पार्वती / स्वर्ग 

  इड़ा-पिंगला=सरस्वती-लक्ष्मी (विद्या-धन )
किडनी डी एम के गई, वेंटीलेटर पार । 
इन्ज्वायिंग मेजोरिटी, बोल गई सरकार । 
 
बोल गई सरकार, बहुत आनंद मनाया । 
त्राहि त्राहि इंसान,  देखना भैया भाया । 
 
सत्ता का आनंद, हाथ की खुजली मिटनी । 
हाथी सैकिल बैठ, लूट लाएगा किडनी । 


वाह वाह ताऊ क्या लात है? में श्री अरविंद मिश्र

ताऊ रामपुरिया 


गुरुवर श्री अरविन्द जी, जिनका धाकड़ ब्लॉग |
वीणा-वादन ब्लॉग पर, साधे ताऊ-राग |
 
साधे ताऊ-राग, फाग में जागे जागे |
गुरु-वाइन का रंग, फिरे हैं भागे भागे |
 
ये ही तो सरकार, ट्रांसफर फर फर रविकर |
विश्वनाथ का नगर, छोड़ के जाते गुरुवर ||


pramod joshi 
इच्छाधारी सर्प हैं, हटे दृश्य वीभत्स |
नाग नाथ को नाथ ले, साँप नाथ का वत्स |

साँप नाथ का वत्स, अघासुर पड़ा अघाया |
हुई मुलायम देह, बहुत भटकाई माया |

मनुज वेश में आय, वोट की मांगे भिक्षा |
सुगढ़ सलोनी देह, वोट देने की इच्छा ||

हकीकत : दिल्ली से भीख मांगते रहे नीतीश !


महेन्द्र श्रीवास्तव 

पटना पटनायक सरिस, नीति चुने नीतीश |
चालाकी में भैंस से, पड़ते हैं इक्कीस |
पड़ते हैं इक्कीस, सदी इक्कीस भुनाते |
ले विशेष अधिकार, ख़्वाब ये हमें दिखाते |
रविकर से है रीस, उधर चालू है सटना |
दो नावों पर पैर, बड़ा मुश्किल है पटना ||




 भूली-बिसरी यादें
लाई-गुड़ देती बटा, मुँह में लगी हराम |
रेवड़ियाँ कुछ पा गए, भूल गए हरिनाम |


भूल गए हरिनाम, इसी में सारा कौसल |
बिन बोये लें काट, चला मत खेतों में हल |


बने निकम्मे लोग, चले हैं कोस अढ़ाई |
गए कई युग बीत, हुई पर कहाँ भलाई  ??



किसे चुने हत्यारो और लुटेरों में ?



tarun_kt 


यारा हत्यारा चुनो, बड़े लुटेरे दुष्ट |
टेरे माया को सदा, करें बैंक संपुष्ट |


करें बैंक संपुष्ट, बना देते भिखमंगा |
मर मर जीना व्यर्थ,  नाचता डाकू नंगा |


हत्यारा है यार, ख़याल रख रहा हमारा |
वह मारे इक बार, रोज मत मरना यारा ||