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Monday, 29 February 2016

निद्रा मृत्यु समान, नींद में पैर हिलाते

घोड़ा तो फिर से बिका, गया बेच के सोय।
लुटा माल-असबाब कुल, सौदागर ले रोय।

सौदागर ले रोय, उसे रविकर समझाते |
निद्रा मृत्यु समान, नींद में पैर हिलाते |

मान अन्यथा लाश, सजा दे चिता निगोड़ा |
दुनिया तो बदनाम, बेच दे लंगड़ा घोड़ा ||

Monday, 22 February 2016

कौड़ी करे न खर्च, कहाँ इक्यावन दो सौ

(1)
दो सौ इक्यावन लगे, फोन बुकिंग आरम्भ।
दिखा करोड़ों का यहाँ, बेमतलब का दम्भ। 


बेमतलब का दम्भ, दर्जनों बुक करवाये।
नोचे बिल्ली खम्भ, फोन आये ना आये।

मुफ्तखोर उस्ताद, दूर रहता है कोसों।
कौड़ी करे न खर्च, कहाँ इक्यावन दो सौ।।
(2)
धोखा खाने का मजा, तुम क्या जानो मित्र।
नहीं भरोसा तुम करो, लगता तभी विचित्र।

लगता तभी विचित्र, भरोसा करना सीखो।
बढे हर्ष उन्माद, ख़ुशी से उछलो चीखो।

हो जाए अतिरेक, होय सब चोखा चोखा।
रविकर खा के देख, मजा देता तब धोखा।।

Sunday, 21 February 2016

पर उनको ना भाय, ब्लैक आउट कर देता-

डंडे पर झंडे फहर, लहर लहर लहराय |
देशद्रोहियों पे कहर, पर उनको ना भाय |

पर उनको ना भाय, ब्लैक आउट कर देता |
पप्पू भाय अघाय, आप अब्बा से नेता |

रविकर रहा उबाल, खोज अफजल के अंडे |
खाए नमक लगाय, गिने फिर जाके डंडे ||

Thursday, 18 February 2016

काँखे भारत वर्ष, "पाक" है साफ़ कन्हैया

मिला समर्थन पाक से, जे एन यू में हर्ष।
छात्र वहाँ के साथ में, काँखे भारत वर्ष।


काँखे भारत वर्ष, "पाक" है साफ़ कन्हैया ।
देशद्रोह आरोप, नकारे पाकी भैया।

देवासुर संग्राम, करे वह सागर मंथन। 
अमृत रहा निकाल, तभी तो मिला समर्थन।।

Tuesday, 16 February 2016

बकरी पीती दूध, दुही जाये गौ माता

गौ माता का दूध तो, है ही अमृत तुल्य |
तेरा गोबर मूत्र भी, औषधि रूप अमूल्य |

औषधि रूप अमूल्य, गाय इक और दुधारू| ||
करदाता वह गाय, हमेशा खुद पर भारू |

कर शोषण सरकार, बनी है भाग्य विधाता |
बकरी पीती दूध, दुही जाये गौ माता ||

Monday, 15 February 2016

मरता गया जमीर, किन्तु गद्दारी जिन्दा


भ्रम फ़ैलाने में लगे, बड़े बड़े श्रीमंत।
कहें हकीकत राय पर, अपना झूठ तुरंत।

अपना झूठ तुरंत, नहीं होते शर्मिंदा।
मरता गया जमीर, किन्तु गद्दारी जिन्दा।

अफजल गुरु घंटाल, आजकल इसी बहाने।
चले बहाने रक्त, सियासी भ्रम फ़ैलाने।।

Sunday, 14 February 2016

मूढात्मा चित्कारती, सुन माँ करुण पुकार-

घनाक्षरी 
श्वेत पट में लिपट, धवलहार धारिणी
वीणा लिए पदम् पे, शारदे विराजती।
पूजते त्रिदेव नित, इंद्र वक्रतुंड यम
वरुण आदि साथ ले, उतारते आरती।
अंधकार दूर कर, ज्ञान का उजेर भर
मूढ़ द्वार पर पड़ा, त्राहिमाम भारती।
पंचमी बसंत आज, चहुँओर रंग रास
जड़ भी चैतन्य होय, जय हो उच्चारती।।


कुण्डलियाँ 
मातु शारदे शत नमन, नमन जीवनाधार। 
मूढात्मा चित्कारती, सुन माँ करुण पुकार। 
सुन माँ करुण पुकार, कृपा कर वीणापाणी। 
आकर स्वयं विराज, पुकारे रविकर वाणी। 
कर जग का कल्याण, शिवम् संसार सार दे। 
करके तमस विनाश, ज्योति दे मातु शारदे।।

Thursday, 4 February 2016

सदा सुहागिन मनु रहे, जोड़ी रहें प्रसन्न-

बेटी दामाद के साथ हम दोनों 
कुण्डलियाँ छंद 

अभिभावक अभिभूत हैं, व्याह हुआ संपन्न । 
सदा सुहागिन मनु रहे,  जोड़ी रहें प्रसन्न। 
जोड़ी रहें प्रसन्न, दुलारी बिटिया रानी।
 करते कन्यादान, नहीं फिर भी बेगानी । 
पूरे फेरे सात, प्रज्वलित पावन पावक। 
रखो वचन कुल याद , राम तेरे अभिभावक।।

दोहे 
साहस संयम शिष्टता, अनुकम्पा औदार्य |
मितव्ययी निर्बोधता, न्याय-पूर्ण सद्कार्य ||

क्षमाशीलता सादगी, सहिष्णुता गंभीर |
सच्चाई प्रफुल्लता, निष्कपटी मन धीर ||

शुद्धि स्वस्ति मेधा रहे, हो चारित्रिक ऐक्य |
दानशीलता आस्तिक, अग्र-विचारी शैक्य ||

सात वचन 

पहले फेरे के वचन,  पालन-पोषण खाद्य |
संगच्छध्वम बोलते, बाजे मंगल वाद्य ||

ऋद्धि सिद्धि समृद्धि हो, त्रि-आयामी स्वास्थ |
भौतिक तन अध्यात्म मन, मिले मानसिक आथ ||

धन-दौलत या शक्ति हो, ख़ुशी मिले या दर्द |
भोगे मिलकर संग में, दोनों औरत-मर्द ||

इक दूजे का नित करें, आदर प्रति-सम्मान |
परिवारों के प्रति रहे, इज्जत एक समान ||

सुन्दर योग्य बलिष्ठ हो, अपने सब संतान |
कहें पाँचवा वचन सुन, बुद्धिमान इंसान ||

शान्ति-दीर्घ जीवन मिले, भूलें नहिं परमार्थ  |
सिद्ध सदा करते रहें, इक दूजे के स्वार्थ ||

रहे भरोसा परस्पर, समझदार-साहचर्य |
प्रेमपुजारी बन रहें, बने रहें आदर्य ||

Wednesday, 3 February 2016

चिंता उसी प्रकार, चुटकुला जैसे सुनते-

सुनते जब नव चुटकुला, हँसते हम तत्काल । 
किन्तु दुबारा क्यूँ  हंसें,  हुआ पुराना माल । 

हुआ पुराना माल, मगर चिंता जब आती। 
बिगड़ जाय सुरताल, हमें सौ बार रुलाती। 

भिन्न भिन्न व्यवहार, नहीं रविकर यूँ चुनते।
चिंता उसी प्रकार, चुटकुला जैसे सुनते।।

Tuesday, 2 February 2016

रविकर के दोहे :पढ़ो वेदना वेद ना, कम कर दो परिमाण

(१)
पढ़ो वेदना वेद ना, कम कर दो परिमाण |
रविकर तू परहित रहित, फिर कैसे निर्वाण ||

(२)
मुश्किल मे उम्मीद का, जो दामन ले थाम |
जाये वह जल्दी उबर, हो बढ़िया परिणाम ||

(३)
छलिया तूने हाथ में, खींची कई लकीर |
मैं भोला समझा किया, इनमे ही तक़दीर ||

(४)
करे बुराई विविधि-विधि, जब कोई शैतान |
चढ़ी महत्ता आपकी, उसके सिर पहचान ||

(५)
बंधी रहे उम्मीद तो, कठिन-समय भी पार |
सब अच्छा होगा जपो, यही जीवनाधार ||

(६)
नहीं सफाई दो कहीं, यही मित्र की चाह |
शत्रु करे शंका सदा, क्या करना परवाह ||

(७)
गलती होने पर करो, दिल से पश्चाताप |
हो हल्ला हरगिज नहीं, हरगिज नहीं प्रलाप ||