Follow by Email

Monday, 24 October 2016

मरते रहे जवान, होय तेरह दिन स्यापा


व्यापारी फिल्मी जगत, कलाकार चुपचाप।
डाक्टर अधिवक्ता मगन, एक्टीविस्ट प्रलाप।
एक्टीविस्ट प्रलाप, खिलाड़ी नेता सारे।
इति अंधा कानून, बाँधता हाथ हमारे।
मरते रहे जवान, होय तेरह दिन स्यापा।
इसीलिए आतंक, विश्व भर मे है व्यापा।।

Friday, 7 October 2016

चिंता रहे छुपाय, पिताजी मिले विहँसकर-

हँसकर विद्यालय गई, घर आई चुपचाप |
देरी होती देख माँ, करती शुरू प्रलाप |
करती शुरू प्रलाप, देवता-देवि मनाये |
सभी लगाएं दौड़, थके-माँदे-घबराये |
मिलते ही मुस्कात, बहन माँ भाई रविकर |
चिंता रहे छुपाय, पिताजी मिले विहँसकर ||

Saturday, 1 October 2016

डाल मट्ठा रोज जड़ मे मुफ्त लेजा।।

बोलियों से चोट खाया है कलेजा।
ऐ शराफत अब जरा तशरीफ लेजा।।
शब्द भेजा खा रहे थे अब तलक वो
क्यूं ललक से यूं पलट पैगाम भेजा।।
जो गले मिलते रहे थे प्यार से तब
खाट पर बैठे, पड़ो उनके गले जा।
जब चुगी चिड़िया हमारा खेत सारा
हाथ पर यूं हाथ रखकर मत मले जा।
दुष्ट करते खोखला खा कर यहीं का
गा रहे जो शत्रु की, फौरन चले जा।
याद रख रविकर सदी से चोट सहता
हो बरेली बांस वापस अब खले जा।।
रोज बावन हाथ बढ़ती बेल विष की
डाल मट्ठा रोज जड़ मे मुफ्त लेजा।।