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Saturday, 18 February 2017

सो जा चादर तान के, रविकर दिया जवाब

😂😂
पूरे होंगे किस तरह, कहो अधूरे ख्वाब।😂😂😂

सो जा चादर तान के, रविकर दिया जवाब।।

😂😂😂😂
क्वांरेपन से शेर है, रविकर अति खूंखार ।
किन्तु हुआ अब पालतू, दुर्गा हुई सवार।।
😂😂


कइयों की कलई खुली, उड़ा कई का रंग।
हुई धुलाई न्याय की, घूमें मस्त मलंग।।


जी भर के कर प्यार तू, कह रविकर चितलाय।
जी भर के जब वह करे, उनका जी भर जाय।।


भय
रही अनिश्चितता डरा, रविकर डर धिक्कार।
कहो इसे रोमांच तो, करे व्यक्ति स्वीकार।।

ईर्ष्या
दूजे की अच्छाइयाँ, कौन करे स्वीकार।
बना सको यदि प्रेरणा, ईर्ष्या जाये हार।।

क्रोध
चीज नियंत्रण से परे, तो रविकर रिसियाय।
करे तथ्य मंजूर यदि, वह सहिष्णु कहलाय।।


Sunday, 12 February 2017

बापू को कंधा दिया, बस्ता धरा उतार-

बापू को कंधा दिया, बस्ता धरा उतार।
तेरह दिन में हो गया, रविकर जिम्मेदार।।

कर्तव्यों का निर्वहन, किया बहन का ब्याह।
भाई पैरों पर खड़ा, बदले किन्तु निगाह ।।

मैया ले आती बहू, पोती रही खिलाय।
खींचतान सहता रहा, सूझे नही उपाय।।

आँगन में दीवाल कर, बँधी खेत में मेड़।
पट्टीदारों से हुई, शुरू रोज मुठभेड़।।

खेत बेंच के कर लिया, रविकर जमा दहेज।
कल बिटिया का ब्याह है, आँसू रखे सहेज।।

शीघ्र गिरे दीवार वह, जिसमें पड़े दरार।
पड़ती रिश्तो में जहाँ, खड़ी करे दीवार।।

एक एक कण अन्न का, हर क्षण का आनन्द। 
कर ग्रहण रविकर सतत्, रख हौसले बुलन्द।।


करे शशक शक जीत पर, कछुवा छुवा लकीर।
छली गयी मछली जहाँ, मेढक ढकता नीर ।

Sunday, 5 February 2017

नारि भूप गुरु अग्नि के, रह मत अधिक करीब-

 नारि भूप गुरु अग्नि के, रह मत अधिक करीब।
रहमत की कर आरजू, जहमत लिखे नसीब।।

सर्प व्याघ्र बालक सुअर, भूप मूर्ख पर-श्वान।
नहीं जगाओ नींद से, खा सकते ये जान।।

कठिन समस्या के मिलें, समाधान आसान।
परामर्शदाता शकुनि, किंवा कृष्ण महान।।

शिल्पी-कृत बुत पूज्य हैं, स्वार्थी प्रभु-कृत मूर्ति।
शिल्पी-कृत करती दिखे, स्वार्थों की क्षतिपूर्ति।

गारी चिंगारी गजब, दे जियरा सुलगाय।
गा री गोरी गीत तू , गम गुस्सा गुम जाय।।

Monday, 30 January 2017

सत्ता कम्बल बाँट दे, उनका ऊन उतार-

भेड़-चाल में फिर फँसी, पड़ी मुफ्त की मार।
सत्ता कम्बल बाँट दे, उनका ऊन उतार।

पैसे पद से जो जुड़े, सुख मे ही वे साथ।
जुड़ वाणी व्यवहार से, ताकि न छूटे हाथ।।

आ जाये कोई नया, अथवा जाये छोड़।
बदल जाय तब जिंदगी, रविकर तीखे मोड़।।

नीम-करैले का चखे, बेमन स्वाद जुबान।
लेकिन खुद कड़ुवी जुबाँ, रही पकाती कान।।

अम्ल लवण मधु मिर्च तक, करे पसन्द जुबान।
किन्तु करैले नीम से, निकले रविकर जान।।

Thursday, 12 January 2017

लंगड़ी मारे अपना बेटा-

बातों में लफ्फाजी देखो।
छल छंदों की बाजी देखो।।

मत दाता की सूरत ताको।
नेता से नाराजी देखो।।

लम्बी चैटों से क्या होगा।
पंडित देखो काजी देखो।।

अंधा राजा अंधी नगरी।
खाजा खा जा भाजी देखो।।

लंगड़ी मारे अपना बेटा
बप्पा चाचा पाजी देखो।।

पैसा तो हरदम जीता है
रविकर घटना ताजी देखो।।